रिजर्व बैंक लौटा सकता है NBFC में भरोसा: रसेश शाह

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IDEALSTOCK | गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की ग्रोथ आने वाले समय में घट सकती है. यह कहना है एडलवाइज समूह के चेयरमैन रसेश शाह का. ईटी से खास बातचीत में शाह ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. यहां पेश है बातचीत के मुख्य अंश:

प्रश्न: क्या एनबीएफसी के लिए कर्ज घट रहा है?
उत्तर: पिछले कुछ समय में लिक्विडिटी कम हुई है. बीते तीन से चार दिनों में इसमें सुधार हुआ है, मगर यह पुरान स्तर पर नहीं पहुंची है. जब आईएलएंडएफएस की रेटिंग घटी थी तो संस्थान काफी ज्यादा डर गए थे.
म्यूचुअल फंड्स ने कर्ज से जुड़ा जोखिम देखा, मगर लिक्विडिटी से जुड़ा जोखिम नहीं देखा. वे बैंकों की तरह लिक्विडिटी से जुड़ी समस्याओं के लिए तैयार नहीं थे. इससे तिमाही के अंत तक कई संकट पैदा हो गए. लिक्विडिटी की दिक्कतें उभर आईं.

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प्रश्न: क्या आने वाले समय में एनबीएफसी की ग्रोथ घट जाएगी?
उत्तर: इसका असर अर्थव्यवस्था पर जरूर पड़ेगा. दिलावी से पहले बाजार को कुछ झटके लग सकते हैं. सिस्टम में बढ़ने वाले कर्ज का करीब 30 फीसदी हिस्सा एनबीएफसी से आता है. इस वजह से छोटी अवधि की रुकावटे आनी
तय है. बैंक देश के हर कोने में अब भी नहीं पहुंचे हैं.
एनबीएफसी में अभी करीब 40 लाख लोग काम करते हैं, जो मुख्यत: कमीशन पर निर्भर हैं. अक्टूबर में उनके कमीशन, कमाई और अन्य भत्तों पर भी असर होगा. कई इलाकों में बैंक नहीं पहुंच पाए और एनबीएफसी ने इसी का
लाभ उठाया. यदि इन पर असर पड़ा तो अल्पावधि में कर्ज स्थिति भी प्रभावित होगी.

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प्रश्न: क्या बुनियादी बिजनेस ने एनबीएफसी के बिजनेस मॉडल को प्रभावित किया है?
उत्तर: सामान्य स्थिति में, एनबीएफसी में म्यूचुअल फंड्स का पैसा लगा होता है. लेनदारी और देनदारी के बीच का संतुलन जरूरी है. इस सीन में खास बदलाव नहीं हुए हैं. नए वितरण के समय दिक्कतें आती हैं, क्योंकि आप
नहीं जानते क्या भविष्य में भी पैसा मिलता रहेगा. यह बाजार का एक विचित्र दौर है.

प्रश्न: इसका हल क्या है?
उत्तर: किसी को तो फिर से विश्वास जगाना होगा. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) यह कर सकता है. एसबीआई ने कई कंपनियों के पोर्टफोलियो खरीदने का ऐलान किया. इससे बाजार में कुछ भरोसा लौटा. रिजर्व बैंक को एक
सतत बाजार का निर्माण करने जरूरत है, जिसमें वित्त प्रवाह जारी रहे.

संपत्तियों को पुन: फाइनेंस किया जा सकता है. इसके लिए निश्चित तौर पर शुल्क होना चाहिए. रिजर्व बैंक को लिक्विडिटी के नियम पेश करने चाहिए. हर एनबीएफसी ने अपने हिसाब से नियम तय कर रखे हैं. मगर सभी के
लिए सामान्य नियम बेहतर हैं.

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प्रश्न: लिक्विडिटी के बारे में क्या कहेंगे?
उत्तर: लोगों ने म्यूचुअल फंड्स से पैसा निकाल कर बैंकों में जमा किया है. म्यूचुअल फंड्स के पास लिक्विडिटी है, मगर एनबीएफसी तक यह नहीं पहुंच रही है. स्थिति सुधर रही है. एनबीएफसी की रफ्तार सुस्त पड़ेगी. बैंक से
कर्ज और म्यूचुअल फंड में पैसा वापस आने से स्थिरता लौटेगी.

प्रश्न: एनबीएफसी कारोबार का आकार कितना बड़ा है?
उत्तर: एनबीएफसी के एसेट आकार के बारे में बाते करें, तो यह निजी बैंकों के बराबर होगा. भारत में कर्ज का स्तर कुल 100 लाख करोड़ रुपये का है. 50 फीसदी बाजार सरकारी बैंकों के पास है, 25 फीसदी निजी बैंकों के पास है.
शेष एक चौथाई बाजार एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के पास है.

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प्रश्न: इस तेजी का कारण क्या है?
उत्तर: देश में 20 निजी बैंक और 300 से अधिक एनबीएफसी हैं. बैंकों की तुलना में एनबीएफसी अधिक तेजी से बढ़े हैं. इंडस्ट्री क्रेडिट 14 से 15 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ा है. पिछले पांच सालों में बैंक 8 से 9 फीसदी से
अधिक की दर से नहीं बढ़ पाए हैं.

उन पर डूबे कर्ज और कम पूंजी का साया है. एनबीएफसी ने इसी फर्क का लाभ उठाया है. एनबीएफसी की क्रेडिट ग्रोथ 25 फीसदी रही है, जबकि बैंकों की करीब

प्रश्न: क्या आईएलएंडएफएस की तुलना रिटेल एनबीएफसी से की जा सकती है?
उत्तर: आईएलएंडएफएस एक इंडस्ट्रियल होल्डिंग कंपनी है. यह एक शुद्ध एनबीएफसी नहीं है. इसकी सीधे तौर पर तुलना एनबीएफसी के कारोबार से नहीं की जा सकती है. वे कर्ज देती हैं, जबकि आईएलएंडएफएस इंफ्रास्ट्रक्चर की
परियोजनाओं में निवेश करती है. 8 से 9 फीसदी की ही रही है.

प्रश्न: एडलवाइज समूह की कौनसी कंपनियां इस साल मुनाफा देंगी?
उत्तर: एसेट मैनेजमेंट और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. आने वाले समय में ग्रोथ कुछ कमजोर पड़ सकती है. कुछ तिमाही मुनाफे पर भी असर होगा. निवेशक इस बात को समझते हैं. छह महीने हम
लिक्विडिटी और क्वालिटी पर जोर देना चाहते हैं.

हम ग्रोथ को लेकर हड़बड़ी में नहीं हैं. एक बार मुनाफा एडजस्ट हो जाए तो हमारी गाड़ी ग्रोथ की पटरी पर लौट आएगी. निवेशकों को ग्रोथ के साथ-साथ क्वालिटी, लिक्विडिटी और दीर्घावधि अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए. यही
एक एनबीएफसी का मूलमंत्र है.

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प्रश्न: आपके अनुसार अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है?
उत्तर: भारत के लिए तेल काफी बड़ी समस्या है. भारत तेल के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है. इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. ऑटो बिक्री घट रही है. रिजर्व बैंक ने इस बार ब्याज दरों में इजाफा नहीं किया.

नोटबंदी और जीएसटी के बाद अर्थव्यववस्था अच्छा कर रही है. स्टील, सीमेंट, पेपर इंडस्ट्रीज बढ़ रही है. हाउसिंग कारोबार भी रफ्तार पकड़ेगा. रुपया गिरने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है. हमारा निर्यात भी बढ़ रहा
हैं, जो अच्छी खबर है.

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