Be Careful Stock Investors Nifty Rock

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IDEAL STOCK | महज 25 सत्रों में सेंसेक्स 4,600 अंक से ज्यादा टूट चुका है. बाजार की यह स्थिति किसी आपदा से कम नहीं है. अगर आप सोच रहे हैं कि बाजार बहुत गिर चुका है और इससे नीचे नहीं जाएगा तो आप गलत हैं. बाजार में और गिरावट आने वाली है.

आइडियल स्टॉक के अनुसार, दलाल पथ पर अभी असली ‘तूफान’ आना बाकी है. यह तूफान छह सप्ताह में दस्तक देगा. उनके तर्क विचारणीय हैं. मौजूदा समय में शेयर बाजार बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं. छोटी से बात का भी बाजार पर बड़ा असर होगा.

कमजोर अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उबाल, रुपये की सुस्ती और कुछ कंपनियों से जुड़े मसलों ने बाजार की बदतर कर दी है.

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आने वाले दिनों में कई बातें बाजार पर दबाव बढ़ा सकती हैं. अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध पहली वजह है. अमेरिका के मध्यावधि चुनाव दूसरी और भारत के घरेलू चुनाव तीसरी बड़ी वजह हैं.

दर्द अभी बाकी है
मारा मानना है कि “निफ्टी 9,900 के स्तर की तरफ बढ़ रहा है.” इसका अर्थ है कि निफ्टी में करीब 400 अंक और सेंसेक्स में लगभग 1,200 अंकों की और गिरावट आ सकती है.”आने वाले छह सप्ताह इक्विटी निवेशकों का दर्द बढ़ सकता है.

” बाजार की सबसे बड़ी चिंता ईरान पर लगने वाले प्रतिबंध हैं, जो 4 नवंबर से लागू होंगे. भारत अपने तेल की जरूरत का 10-12 फीसदी ईरान से आयात करता है.

हमारा मानना है कि “बाजार अभी इस मसले को हल्के में ले रहा है. रूस और सउदी अरब तेल के सबसे बड़ी उत्पादक हैं. इस वजह से वह वजह से ईरान पर प्रतिबंध को ज्यादा तवज्जों नहीं दे रहा है. छह सप्ताह बाद यानी नवंबर मध्य तक तस्वीर साफ हो जाएगी.

निवेशकों का इम्तिहान

विदेशी निवेशक तेजी से भारतीय बाजार से कन्नी काट रहे हैं. इस साल वे अभी तक 17,664 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जो साल 2008 के 52,987 करोड़ रुपये की निकासी के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है. बीते तीन सत्रों में विदेशी निवेशकों ने 1,500-1,600 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं.

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इस तरह की बिकवाली से बाजार और लुढ़क सकता है. विदेशी निवेशकों ने बीएसई 200 इंडेक्स के शेयरों में करीब $408 अरब का निवेश किया हुआ है. प्रभाकर ने कहा, “बाजार लिक्विडिटी पर चलते हैं. म्यूचुअल फंड स्कीमें नीचे हैं. ऐसे में रिटेल निवेशकों का विश्वास कायम रहना एक कठिन सवाल है.”

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव

नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होंगे. इन चुवानों के बाद अमेरिका दोस्ती और दुश्मनी कैसे करता है, इस पर सभी की नजरें होंगी. चुनाव ट्रेड वॉर और ईरानी प्रतिबंधों पर भी असर डालेंगे. “लोगों को ट्रेड वॉर पर नजर बनाए रखनी चाहिए, जो चुनावों के बाद बढ़ सकता है.”
ईरान के प्रतिबंधों का अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर गहरा असर होगा. भारत में कच्चा तेल और महंगा हो सकता है. इससे मंहगाई, चालू खाता घाटा, राजकोषीय घाटा, बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी सभी में बढ़ोतरी हो सकती है.

भारतीय राज्यों में चुनाव

इस साल भारत के पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं. इसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम शामिल हैं. इन चुनावों को आगामी लोकसभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा सकता है. भाटिया ने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव के परिणाम भी बाजार को डूबा सकते हैं.
“भारतीय बाजारों का प्रीमियम कम हुआ है, मगर यह अब भी दूसरों से ज्यादा है. इस वजह से और गिरावट आ सकती है.” कच्चे तेल की कीमतों में कटौती को भी बाजार ने अच्छा फैसला नहीं माना. इसे एक लोकलुभावन उपाय के रूप में देखा गया.
इस वजह से पेट्रोलियम कंपनियों के शेयरों ने दो ही सत्रों में एक तिहाई फीसदी तक का गोता लगाया. बाजार को उम्मीद है कि चुनावों से पहले सरकार कई लोकलुभावन वादे कर सकती है. पेट्रोल और डीजल के दाम आने वाले चुनावों में अहम मुद्दा बन कर उभरेंगे.

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