गिरते बाजार में भी इन शेयरों में निवेश बढ़ा रहे हैं विदेशी निवेशक

IDEALSTOCK | विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने हाल ही में भारतीय शेयर बाजारों में इक्विटी की जमकर बिक्री की. घरेलू बाजार के प्रति उनका रुख इस साल नरम ही रहा है. हालांकि, बावजूद इसके वे चुनिंदा कंपनियों के शेयरों की खूब खरीदारी की है.

जुलाई से सिंतबर के दौरान विदेशी निवेशकों ने करीब 300 से अधिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई. कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जिसमें विदेशी निवेशक बीती चार तिमाही से लगातार निवेश बढ़ा रहे हैं. इसमें से चुनिंदा शेयरों में कमजोरी बाजार में भी शानदार नतीजे पेश किए हैं.

खरीदारी इस सूची में टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस, एचईजी और जेके पेपर जैसे नाम शामिल थे. गौरतलब है कि बीते तीन महीनों में बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 इंडेक्स 11 फीसदी तक नीचे खिसक आए हैं. मिडकैप इंडेक्स 13 फीसदी टूटा है.

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इन कंपनियों में निवेश का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं. बीते कुछ सप्ताह में उनकी बिकवाली की तीव्रता काफी ज्यादा बढ़ गई है. ऐसे में ये शेयर आने वाला सुनहरा कल लिख सकते हैं.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बीते तीन मीहनों में 32,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे हैं. मगर ईटी आपको बता रहा है 20 ऐसे शेयर, जिसमें विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही हैं.

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Shocking News NBFC पर संकट से घट सकती है

IDEALSTOCK | गैर-बैकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए पैसा जुटाना मुश्किल हो गया है. उनकी कठिनाइयों का खामियाजा ऑटो कंपनियों को भुगतना पड़ सकता है. कार और दोपहिया खरीदने के लिए लोन लेने में ग्राहकों को दिक्कत आ सकती है.

लिक्विडिटी कम होने से ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में फाइनेंसिंग के विकल्प घट रहे हैं. वित्त वर्ष 19 में ज्यादातर सूचीबद्ध ऑटो कंपनियों की ग्रोथ रेट दोहरे अंक में पहुंचने की उम्मीद थी. ज्यादातर कंपनियां पहली छमाही में यह ग्रोथ हासिल करने में कामयाब रहीं. मगर दूसरी छमाही में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. दोपहिया वाहनों पर इसकी मार ज्यादा होगी. बीते पांच सालों से ऑटो लोन में एनबीएफसी की हिस्सेदारी काफी बढ़ी है. जगह-जगह एनबीएफसी की पहुंच ने पैसेंजर वाहन, ट्रैक्टर और कमर्शियल वाहनों की बिक्री बढ़ाई है.

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हालांकि, इस त्योहारी सीजन में एनबीएफसी ऑटो वाहन के ऑफर्स में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इससे उन कंपनियों की बिक्री पर करीब 10 से 15 फीसदी तक का असर पड़ सकता है. ऐसे में इस साल कमजोर पड़े ऑटो कंपनियों का पीई और भी ज्यादा घट सकता है. गौरतलब है कि इस साल ऑटो कंपनियों के शेयरों ने 12 से 56 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की है. टीवीएस मोटर्स को छोड़ दें, तो सभी दिग्गज ऑटो कंपनियों के पीई अनुपात, उनके दीर्घकालिक औसत के काफी नीचे खिसक आए हैं. क्रेडिट सुइस के अनुसार, वित्त वर्ष 14 तक सिर्फ 30 फीसदी दोपहिया वाहन ही लोन से खरीदे जाते थे. मगर वित्त वर्ष 18 तक यह आंकड़ा 50 फीसदी तक पहुंच गया. दूसरी तरफ, इस दौरान पैसेंजर गाड़ियों, ट्रैक्टर और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 5 फीसदी का इजाफा हुआ.

इस तेजी की मुख्य वजह एनबीएफसी है. दोपहिया वाहन कंपनियों की बिक्री में एनबीएफसी की हिस्सेदारी एक साल में 60 फीसदी बढ़ी है. पिछले पांचों में यह ग्रोथ 8 फीसदी रही है. इन कंपनियों ने 24 महीनों से कम अवधि
और छोटे कर्ज वाले लोन में भी दिलचस्पी बढ़ाई है. पैसेंजर वाहनों में फाइनेंसिंग स्तर 81 फीसदी तक है. हालांकि, कार सेगमेंट में यह हिस्सेदारी सिर्फ 17 फीसदी है. ट्रैक्टर सेगमेंट में एनबीएफसी की हिस्सेदारी काफी बेहतर है. इनके लिए प्रथामिकता के आधार पर कर्ज दिया जाता है. इसी वजह से बैंक इस कर्ज को आसानी से खरीद लेते हैं.

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दोपहिया वाहनों की वॉल्यूम की ग्रोथ कंपनियों के अपने फाइनेंस के स्रोत पर निर्भर करेगी. उनके लिए एनबीएफसी का विकल्प तलाशना एक चुनौती है. हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर्स के पास फाइनेंस के अपने स्रोत हैं. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान आयशर मोटर्स को होने के आसार हैं.सितंबर तिमाही में हीरो मोटोकॉर्प के प्रबंधन ने कहा कि बिक्री में हीरो फिनकॉर्प की हिस्सेदारी 11 फीसदी है. वित्त वर्ष 19 तक कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ 8 से 10 फीसदी तक रहने की उम्मीद है. हीरो को अपने खुद के स्रोत पर विश्वास है, मगर यह दीर्घावधि हल नहीं है. प्राइम डेटाबेस के अनुसार, हीरो फिनकॉर्प ने अप्रैल 2018 में कमर्शियल पेपर के जरिए 670 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसके लिए 6.91 फीसदी की ब्याज दर निर्धारित की गई थी. इसके बाद कंपनी ने हाल ही में 9.25 फीसदी की  ब्याज दर पर 350 करोड़ रुपये जुटाए हैं.

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इसी तरह टीवीएस मोटर्स की टीवीएस क्रेडिट सर्विसेस ने अप्रैल 2018 में 7.19 फीसदी ब्याज की दर से पैसा जुटाया था. मगर सितंबर 2018 में कंपनी के लिए कर्ज की दर बढ़कर 8.24 फीसदी हो गई थी. कंपनी ने 100 करोड़
रुपये जुटाए थे.केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 13 से वित्त वर्ष 18 के दौरान वाहन लोन 11.3 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ कर 1.89 लाख करोड़ रुपये का स्तर पार कर चुका है. कुल कर्ज में वाहन लोन की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 13 में 1.92 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 18 में 2.47 फीसदी तक पहुंच गई है.

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25 stocks fell 10-30% in only 4 exchanging sessions.

IDEALSTOCK | In the S&P BSE Mid-top record, three stocks slipped 10-30% which incorporate names like L&T Back Holdings, Piramal Enterprises, and Indiabulls Housing Finance. The S&P BSE Sensex lost 1.2 percent while Nifty50 saw a decrease of 1.6 percent for the week finished October 12 however the genuine savagery was found in little and midcaps which dove 10-30 percent in a similar period.

Upwards of 25 stocks in the S&P BSE500 record dove, 10-30 percent for the week finished

19 October which incorporates names like Indiabulls Housing Finance, Dewan Housing Finance, Indiabulls Real Estate, PNB Housing Finance, 8K Miles, Kwality, Dish TV, Avenue Supermarts, Yes Bank, Bandhan Bank and so on among others.

Frail worldwide signs, exchange war concerns, ascend in unrefined petroleum costs, the rise of liquidity fears in NBFCs and additionally NBFCs, alongside frail macroeconomic information, for example, ascend in swelling and fall in IIP, offering weight from outside financial specialists, blended outcomes from.

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India Inc. and hawkish critique of US Federal Reserve all weighed on the conclusion.

In the S&P BSE Small-Cap list Adlabs Entertainment slipped 20 percent, trailed by Nutraplus India (down 19%), 8K Miles (down 18%), Mcnally Bharat (down 18%), Repro Home Back (down 16%), Edelweiss Financial Services (down 15%) and so forth among others. In the S&P BSE Mid-top file, three stocks slipped 10-30% which incorporate names like L&T Back Holdings, Piramal Enterprises, and Indiabulls Housing Finance. Indian markets saw substantial offering weight close key obstruction levels and in the long run, it broke underneath 10,300 levels on an intraday premise. The Nifty50 slipped 1.6 percent for the week yet shut over 10,300 levels at 10,303.

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TOP HOLDING 20 – 20 STOCK OF OCTOBER

IDEALSTOCK |  आपको उन 20 स्टॉक्स के बारे में जानकारी देंगे जिनमें आज ट्रेडिंग कर के आप कमा सकते हैं मुनाफा। भले ही वो शेयर चढ़े या लुढ़के आपको फायदा देकर ही जाएंगे। यानी 20 शेयरों में आज खरीदने या बेचने पर सलाह। ये सभी स्टॉक्स अक्टूबर होल्डिंग के लिए हैं .

Happy Dussehra

पहले टीम हैं A

DCB Bank: Buy – Rs 160, Stoplaus – 158, Target – 165 get intraday call for same script click here

BPCL: Buy – Rs 285, Stoploss – 280, Target – Rs. 295 get intraday call for same script to click here

IOC: Buy – Rs 132, Stoploss – Rs 130, Target – 142 get intraday call for same script click here

HPCL: Buy – Rs 207, Stoploss – Rs 205, Target – Rs 217 get intraday call for same script click here

MindTree: Sell – Rs 978, Stoplaus – Rs 988, Target – 951 get intraday call for same script click here

Jet Airways: Buy – Rs 216.5, Stoploss – Rs 214, Target – Rs 224 get intraday call for the same script to click here

Thangamayel Jewelery: Buy – Rs 352.15, Stoploss – Rs 350, Target – Rs 363 get intraday call for same script to click here

Titan: Buy – Rs 800, Stoploss – Rs 792, Target – 824 get intraday call for same script click here

ACC: Sell – Rs 1540, Stoploss – Rs 1555, Target – Rs 1495 get intraday call for same script click here

Astral Poly: Buy – Rs 945, Stop Loss – Rs 940, Target – 975 get intraday call for same script to click here

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पहले टीम हैं B

Sunflag: buy – Rs 59.4, stoploss – Rs 59, target – Rs 63 get intraday call for same script click here

Vardhaman Special Steels: Buy – Rs 107, Stoplaus – 104, Target – 130 get intraday call for same script click here

MT Education: Buy – Rs 51.25, Stoplaus – Rs 51, Target – Rs 55 get intraday call for same script click here

Career Point: Buy – Rs. 73, Stop Loss – 72 Rs, Target – Rs. 80 get intraday call for same script click here

TBZ: Buy – Rs 56.9, Stoplaus – 56, Target – Rs 59 get intraday call for same script click here

PC Jewelery: Buy – Rs 56, Stoplaus – 55, Target – 65 Rs get intraday call for same script click here

Arvind: Sell – Rs 315, Stoploss – Rs 318, Target – 300 get intraday call for same script click here

Raymond: Sell – Rs 642, Stoploss – Rs 650, Target – 630 get intraday call for same script click here

Century Textiles: Sell – Rs 785, Stoploss – Rs 790, Target – Rs 740 get intraday call for same script click here

Ujjivan: Sell – Rs 232, Stoploss – Rs 238, Target – Rs 215 get intraday call for same script click here

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डीएलएफ लि. | बजाज ऑटो फाइनेंस लि. | आज का ट्रेंड

IDEALSTOCK | डीएलएफ लि. के शेयर रूपये 135.0 के लक्ष्य मूल्य पर बेचें . डीएलएफ लि. . का मौजूदा बाजार मूल्य रूपये 144.45 है .मार्केट एक्सपर्ट ने इसकी समयावधि इंट्रा डे तय की है, जब डीएलएफ लि. की कीमत अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच सकती है. स्टॉपलॉस रुपये 150 रखें और इसका सख्ती से पालन करें.
डीएलएफ लि., निर्माण क्षेत्र क्षेत्र में सक्रिय, साल 1963 में निगमित, एक लार्ज कैप कंपनी है (मार्केट कैप – Rs
25774.60 करोड़) |

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समाप्ति तिमाही 30-06-2018 के लिए, कंपनी द्वारा रिपोर्टेड संगठित बिक्री – Rs 1507.35 करोड़ है, 9.41 %
ऊपर, अंतिम तिमाही की बिक्री-Rs 1377.66 करोड़ से, और -26.39 % नीचे पिछले साल की इसी तिमाही की
बिक्री – Rs 2047.70 करोड़ से| नवीनतम तिमाही में कंपनी का Rs -69.06 करोड़ का रिपोर्टेड टैक्स
पश्चात शुद्ध मुनाफा है|

IDEALSTOCK | बजाज ऑटो फाइनेंस लि. के शेयर रूपये 1950.0 के लक्ष्य मूल्य पर बेचें . बजाज ऑटो फाइनेंस लि. . का मौजूदा बाजार मूल्य रूपये 2151.55 है .मार्केट एक्सपर्ट ने इसकी समयावधि इंट्रा डे तय की है, जब बजाज ऑटो फाइनेंस लि. की कीमत अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच सकती है.  स्टॉपलॉस रुपये 2250 रखें और इसका सख्ती से पालन करें.

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बजाज ऑटो फाइनेंस लि., वित्त क्षेत्र में सक्रिय, साल 1987 में निगमित, एक लार्ज कैप कंपनी है (मार्केट कैप – Rs
124352.79 करोड़) |

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समाप्ति तिमाही 30-06-2018 के लिए, कंपनी द्वारा रिपोर्टेड संगठित बिक्री – Rs 3936.45 करोड़ है, 12.69 %
ऊपर, अंतिम तिमाही की बिक्री-Rs 3493.08 करोड़ से, और 38.96 % ऊपर पिछले साल की इसी तिमाही की
बिक्री – Rs 2832.85 करोड़ से| नवीनतम तिमाही में कंपनी का Rs 835.89 करोड़ का रिपोर्टेड टैक्स
पश्चात शुद्ध मुनाफा है| 30-09-2018 को, कंपनी के कुल, 577,968,388 शेयर बकाया है|

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Gold stays near 2-1/2-month high as risk

IDEALSTOCK|Gold touched $1,233.26 on Monday, its highest since July 26, as global stocks slid on rising tensions between Western powers and Saudi Arabia and concerns over the pace of global economic growth. Asian stocks  market rose modestly on Tuesday, gaining a firmer footing after a week of heavy losses.

Gold prices held steady on Tuesday near the last session’s 2-1/2-month high as risk-averse investors sought refuge in the metal amid rising political tensions and economic uncertainty

Spot gold was little changed at $1,226.11 an ounce at 0353 GMT.

Gold touched $1,233.26 on Monday, its highest since July 26, as global stocks market  slid on rising tensions between Western powers and Saudi Arabia and concerns over the pace of global economic growth. Asian stocks market rose modestly on Tuesday, gaining a firmer footing after a week of heavy losses.

While the sell-off in stocks rekindled some demand, there were other key factors in play. With escalating trade tensions, concerns over slowing global growth, geopolitical tensions and U.S. mid-term election jitters in the mix, gold has a chance to shine,” .

While the risk-off trading environment is poised to send gold higher in the near term, the medium- to longer-term outlook remains dictated by the dollar and U.S. rate hike expectations.

त्योहारी मांग घटने से हाजिर बाजार में सस्ता हुआ सोना

IDEALSTOCK| कमजोर वैश्विक रुख और घरेलू मांग में कमी के चलते दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 150 रुपये गिरकर 32,030 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया. सिक्का निर्माताओं एवं औद्योगिक इकाइयों के उठाव कम करने से चांदी भी 220 रुपये गिरकर 39,480 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही.

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कारोबारियों ने कहा कि डॉलर में मजबूती से वैश्विक स्तर पर कीमती धातु के रुख में नरमी रही. इसका असर स्थानीय बाजार में भी सोने के भाव पर देखने को मिला. इसके अलावा, स्थानीय आभूषण कारोबारियों और खुदरा विक्रेताओं की मांग घटने से भी सोने पर दबाव रहा. वैश्विक स्तर पर, सिंगापुर में सोना 0.15 फीसदी गिरकर 1,223.70 डॉलर प्रति औंस रहा. चांदी 0.14 फीसदी गिरकर 14.71 डॉलर प्रति औंस रही.

दिल्ली सर्राफा बाजार में, 99.9 फीसदी और 99.5 फीसदी शुद्धता वाला सोना 150 और 140 रुपये गिरकर क्रमश: 32,030 रुपये और 31,880 रुपये प्रति दस ग्राम पर रहा. हालांकि, सीमित सौदों में आठ ग्राम वाली गिन्नी 24,700 रुपये प्रति इकाई के पूर्व स्तर पर टिकी रही.

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चांदी हाजिर 220 रुपये गिरकर 39,480 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक डिलीवरी 240 रुपये गिरकर 38,860 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही. हालांकि, चांदी सिक्का लिवाल एवं बिकवाल क्रमश: 75,000 और 76,000 रुपये प्रति सैकड़ा के पूर्व स्तर पर रहे.

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रिजर्व बैंक लौटा सकता है NBFC में भरोसा: रसेश शाह

IDEALSTOCK | गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की ग्रोथ आने वाले समय में घट सकती है. यह कहना है एडलवाइज समूह के चेयरमैन रसेश शाह का. ईटी से खास बातचीत में शाह ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. यहां पेश है बातचीत के मुख्य अंश:

प्रश्न: क्या एनबीएफसी के लिए कर्ज घट रहा है?
उत्तर: पिछले कुछ समय में लिक्विडिटी कम हुई है. बीते तीन से चार दिनों में इसमें सुधार हुआ है, मगर यह पुरान स्तर पर नहीं पहुंची है. जब आईएलएंडएफएस की रेटिंग घटी थी तो संस्थान काफी ज्यादा डर गए थे.
म्यूचुअल फंड्स ने कर्ज से जुड़ा जोखिम देखा, मगर लिक्विडिटी से जुड़ा जोखिम नहीं देखा. वे बैंकों की तरह लिक्विडिटी से जुड़ी समस्याओं के लिए तैयार नहीं थे. इससे तिमाही के अंत तक कई संकट पैदा हो गए. लिक्विडिटी की दिक्कतें उभर आईं.

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प्रश्न: क्या आने वाले समय में एनबीएफसी की ग्रोथ घट जाएगी?
उत्तर: इसका असर अर्थव्यवस्था पर जरूर पड़ेगा. दिलावी से पहले बाजार को कुछ झटके लग सकते हैं. सिस्टम में बढ़ने वाले कर्ज का करीब 30 फीसदी हिस्सा एनबीएफसी से आता है. इस वजह से छोटी अवधि की रुकावटे आनी
तय है. बैंक देश के हर कोने में अब भी नहीं पहुंचे हैं.
एनबीएफसी में अभी करीब 40 लाख लोग काम करते हैं, जो मुख्यत: कमीशन पर निर्भर हैं. अक्टूबर में उनके कमीशन, कमाई और अन्य भत्तों पर भी असर होगा. कई इलाकों में बैंक नहीं पहुंच पाए और एनबीएफसी ने इसी का
लाभ उठाया. यदि इन पर असर पड़ा तो अल्पावधि में कर्ज स्थिति भी प्रभावित होगी.

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प्रश्न: क्या बुनियादी बिजनेस ने एनबीएफसी के बिजनेस मॉडल को प्रभावित किया है?
उत्तर: सामान्य स्थिति में, एनबीएफसी में म्यूचुअल फंड्स का पैसा लगा होता है. लेनदारी और देनदारी के बीच का संतुलन जरूरी है. इस सीन में खास बदलाव नहीं हुए हैं. नए वितरण के समय दिक्कतें आती हैं, क्योंकि आप
नहीं जानते क्या भविष्य में भी पैसा मिलता रहेगा. यह बाजार का एक विचित्र दौर है.

प्रश्न: इसका हल क्या है?
उत्तर: किसी को तो फिर से विश्वास जगाना होगा. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) यह कर सकता है. एसबीआई ने कई कंपनियों के पोर्टफोलियो खरीदने का ऐलान किया. इससे बाजार में कुछ भरोसा लौटा. रिजर्व बैंक को एक
सतत बाजार का निर्माण करने जरूरत है, जिसमें वित्त प्रवाह जारी रहे.

संपत्तियों को पुन: फाइनेंस किया जा सकता है. इसके लिए निश्चित तौर पर शुल्क होना चाहिए. रिजर्व बैंक को लिक्विडिटी के नियम पेश करने चाहिए. हर एनबीएफसी ने अपने हिसाब से नियम तय कर रखे हैं. मगर सभी के
लिए सामान्य नियम बेहतर हैं.

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प्रश्न: लिक्विडिटी के बारे में क्या कहेंगे?
उत्तर: लोगों ने म्यूचुअल फंड्स से पैसा निकाल कर बैंकों में जमा किया है. म्यूचुअल फंड्स के पास लिक्विडिटी है, मगर एनबीएफसी तक यह नहीं पहुंच रही है. स्थिति सुधर रही है. एनबीएफसी की रफ्तार सुस्त पड़ेगी. बैंक से
कर्ज और म्यूचुअल फंड में पैसा वापस आने से स्थिरता लौटेगी.

प्रश्न: एनबीएफसी कारोबार का आकार कितना बड़ा है?
उत्तर: एनबीएफसी के एसेट आकार के बारे में बाते करें, तो यह निजी बैंकों के बराबर होगा. भारत में कर्ज का स्तर कुल 100 लाख करोड़ रुपये का है. 50 फीसदी बाजार सरकारी बैंकों के पास है, 25 फीसदी निजी बैंकों के पास है.
शेष एक चौथाई बाजार एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के पास है.

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प्रश्न: इस तेजी का कारण क्या है?
उत्तर: देश में 20 निजी बैंक और 300 से अधिक एनबीएफसी हैं. बैंकों की तुलना में एनबीएफसी अधिक तेजी से बढ़े हैं. इंडस्ट्री क्रेडिट 14 से 15 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ा है. पिछले पांच सालों में बैंक 8 से 9 फीसदी से
अधिक की दर से नहीं बढ़ पाए हैं.

उन पर डूबे कर्ज और कम पूंजी का साया है. एनबीएफसी ने इसी फर्क का लाभ उठाया है. एनबीएफसी की क्रेडिट ग्रोथ 25 फीसदी रही है, जबकि बैंकों की करीब

प्रश्न: क्या आईएलएंडएफएस की तुलना रिटेल एनबीएफसी से की जा सकती है?
उत्तर: आईएलएंडएफएस एक इंडस्ट्रियल होल्डिंग कंपनी है. यह एक शुद्ध एनबीएफसी नहीं है. इसकी सीधे तौर पर तुलना एनबीएफसी के कारोबार से नहीं की जा सकती है. वे कर्ज देती हैं, जबकि आईएलएंडएफएस इंफ्रास्ट्रक्चर की
परियोजनाओं में निवेश करती है. 8 से 9 फीसदी की ही रही है.

प्रश्न: एडलवाइज समूह की कौनसी कंपनियां इस साल मुनाफा देंगी?
उत्तर: एसेट मैनेजमेंट और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. आने वाले समय में ग्रोथ कुछ कमजोर पड़ सकती है. कुछ तिमाही मुनाफे पर भी असर होगा. निवेशक इस बात को समझते हैं. छह महीने हम
लिक्विडिटी और क्वालिटी पर जोर देना चाहते हैं.

हम ग्रोथ को लेकर हड़बड़ी में नहीं हैं. एक बार मुनाफा एडजस्ट हो जाए तो हमारी गाड़ी ग्रोथ की पटरी पर लौट आएगी. निवेशकों को ग्रोथ के साथ-साथ क्वालिटी, लिक्विडिटी और दीर्घावधि अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए. यही
एक एनबीएफसी का मूलमंत्र है.

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प्रश्न: आपके अनुसार अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है?
उत्तर: भारत के लिए तेल काफी बड़ी समस्या है. भारत तेल के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है. इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. ऑटो बिक्री घट रही है. रिजर्व बैंक ने इस बार ब्याज दरों में इजाफा नहीं किया.

नोटबंदी और जीएसटी के बाद अर्थव्यववस्था अच्छा कर रही है. स्टील, सीमेंट, पेपर इंडस्ट्रीज बढ़ रही है. हाउसिंग कारोबार भी रफ्तार पकड़ेगा. रुपया गिरने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है. हमारा निर्यात भी बढ़ रहा
हैं, जो अच्छी खबर है.

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क्या आपको HUL के शेयरों में निवेश करना चाहिए?

IDEALSTOCK: हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के सितंबर तिमाही के नतीजे अच्छे रहे हैं. इससे कई ब्रोकरेज फर्मों ने इस कंपनी को लेकर अच्छी संभावना जताई है. कंपनी ने शुक्रवार को अपने नतीजों का एलान किया. इसका मुनाफा 19.51 फीसदी बढ़ा है. कई कैटेगरी में कंपनी ने 10 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दिखाई है.

सितंबर तिमाही में कंपनी ने 1,525 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है. एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 1,276 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. मॉर्गन स्टेनली ने कंपनी के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है. उसने इसके शेयरों के लिए 1,260 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है. उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “कंपनी के मार्जिन में अच्छी वृद्धि जारी है. कंपनी का मुनाफा हमारे अनुमान से 5 फीसदी ज्यादा रहा है.”

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इसके शेयरों के लिए 1,870 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है. उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “परिचालन के स्तर पर कंपनी अपनी ताकत दिखा रही है. मांग में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है.” सीएलएसए ने भी एचयूएल के शेयरों को लेकर सकारात्मक राय दी है.

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24 फीसदी की एडजस्टेड एबिड्टा ग्रोथ और 10 फीसदी की वॉल्यूम ग्रोथ हमारे अनुमाने के मुकाबले ज्यादा रही है. हालांकि, उसने यह भी कहा है कि भविष्य में कंपनी के मार्जिन को लेकर थोड़ा संदेह दिख रहा है. लेकिन कंपनी का प्रबंधन काफी सकारात्मक नजर आ रहा है. इस ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी के शेयरों के लिए 1,750 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है.

सिटी ने एचयूएल के शेयरों के बारे में अपनी राय बदलकर ‘तटस्थ’ कर दी है. इसने इसके शेयरों के लिए 1,660 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है. उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “इसके शेयरों में गिरावट के बाद हमें आगे अच्छी संभावना दिख रही है. कंपनी की आय अच्छे स्तर पर बनी हुई है. ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ रही है”

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सितंबर तिमाही में कंपनी की बिक्री 9,138 करोड़ रुपये रही. पिछले साल की समान अवधि में यह 8,199 करोड़ रुपये रही. इस तरह सेल्स 11.45 फीसदी बढ़ी है. कंपनी ने नियामक को यह जानकारी दी है. मंगलवार को कंपनी के शेयर का भाव दोपहर में 1 फीसदी की मजबूती के साथ 1541.85 रुपये पर था.