Investment & Finance Sector Analysis Report

IDEALSTOCK | There are 11,522 Non-Banking Financial Companies (NBFCs) registered with the Reserve Bank of India out of which a lion’s share of 98.5% are non-deposit accepting with the balance of 1.5% being deposit accepting NBFCs. Around 218 non-deposit accepting NBFCs have been classified as systemically important. NBFCs have established the presence in specialized segments, for e.g. HDFC (mortgage loans), Mahindra Finance (Agri finance), Power Finance Corporation (power finance) & Shriram Transport Finance (pre-owned commercial vehicle finance).

Present in the competing fields of vehicle financing, housing loans, hire purchase, lease and personal loans, NBFCs, have emerged as key financial intermediaries for small-scale and retail sectors thereby forming an essential part of shadow banking in India. NBFCs are the third largest segment in the Indian financial system after commercial banks and insurance companies and account for 9% of the total financial assets. Moreover, small and medium enterprise loans account for 10.5% share in the overall credit of NBFCs in FY17. In the case of banks, MSE loans accounted for a mere 5.2%.



But unlike the shadow banking entities in other countries, NBFCs are regulated by the Reserve Bank of India that has been working towards bringing them at par with the banking regulations. Armed with easier sanction procedures, flexibility, and wide reach in small towns and cities, NBFCs stand on a surer footing vis-a-vis banks.

Unlike banks, NBFCs are not required to maintain cash reserve ratio (CRR) and a statutory liquid ratio (SLR). The even priority sector lending norm of 40% (of total advances) is not applicable to them.

But NBFCs cannot access low-cost deposits like their banking peers. Borrowings make up a lion’s share of 70% of their liabilities, as per CARE Ratings. A number of NBFCs have been issuing non-convertible debentures (NCDs) in order to increase liquidity. For systemically important NBFCs, debentures had the largest share 49% of borrowings in FY17. Bank borrowings and commercial paper account for 22% and 10% in the liability mix.

In November 2014, the Reserve Bank of India tightened norms in asset classification and provisioning for NBFCs to bring them at par with banks. The time period after which an overdue asset would be classified as a non-performing was reduced from six months to three months in a phase-wise manner until FY18. Similarly, the time period for classification of sub-standard and doubtful assets was also reduced from 18 months to 12 months. Additionally, the provisioning for standard assets was increased from 0.25% to 0.4% of the outstanding by FY18. These developments have led to an increase in the bad loans and provisions for NBC’s.

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crude oil price today सऊदी अरब में तनाव

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IDEALSTOCK. पिछले हफ्ते की भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल में आज तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड का भाव 1 फीसदी चढ़कर 81 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है. वहीं नायमेक्स क्रूड का दाम 1.12 फीसदी की तेजी के साथ 72 डॉलर के पार चला गया है. घरेलू बाजार की बात करें तो MCX पर कच्चे तेल का भाव 0.97 फीसदी की तेजी के साथ 5,294 रुपये पर पहुंच गया है.

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एक प्रमुख सऊदी पत्रकार के गायब होने पर राजनीतिक तनाव बढ़ा है. इसके अलावा अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध के लागू होने की तारीख काफी नजदीक आ गई है. अमेरिका ने भारत सहित कई देशों से 4 नवंबर से ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर देने के लिए कहा है.

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इस बीच दक्षिण कोरिया ने ईरान से क्रूड का इंपोर्ट पूरी तरह से बंद कर दिया है. सितंबर में उसने यहां से क्रूड का इंपोर्ट नहीं किया. ऐसे में आगे चलकर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इन वजहों से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटी है, क्योंकि बाजार को सप्लाई घटने का डर सता रहा है.

हालांकि दूसरी ओर तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक ने 2018 और 2019 में कच्चे तेल की मांग में कमी का अनुमान जताया है. इससे आगे कीमतों में बहुत ज्यादा तेजी के संकेत नहीं दिख रहे हैं.

NBFCs likely to see 30% Growth | Market Live

IDEALSTOCK: NBFCs are expected to report a 30 percent growth in second-quarter profit while margins are likely to decline by 20 basis points due to tight liquidity and rising interest rates. Increased incremental funding costs for NBFCs are expected to increase by 50 basis points, affecting housing finance companies. Vehicle financiers, especially those giving funds to buy trucks and buses, are likely to witness a very strong quarter due to demand from the rural economy.


NBFC earnings will take support from strong momentum in the first two months of the second quarter. The last 10 days after IL&FS default came to light, however, have been challenging for them.

“We expect NBFCs to sustain their growth momentum and asset quality performance in Q2FY19,” said Edelweiss in a report. “Given the recent turn of events, we expect funding to become expensive, risk appetite to wane, growth to moderate and companies to focus more on preserving liquidity.”

Within NBFCs, Motilal Oswal said that HDFC is best placed to navigate the rising interest-rate environment, with best-in-class liability structure and 30 percent funding from public deposits.


Also, HDFC’s disbursement growth is likely to be strong and spreads improve as the company has raised lending rates during the second quarter. Investment profit of Rs 787 crore from selling a stake in the asset management company should boost net income.

“Individual loan growth should improve momentum and we expect it to track mid-teen growth on a year-on-year basis,” said Edelweiss on LIC Housing Finance. “Asset quality will be steady. Pending resolution in the corporate loan book is not likely to crystallize this quarter as well, and net interest margins on the lower base set in Q1 could see a sequential uptick, with the hike in prime lending rates.”

The floods in Kerala could have an adverse impact on growth momentum and asset quality due to the slowdown in activity levels for Manappuram and Muthoot FinanceNSE 1.10 %.

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इन 420 कंपनियों के शेयर बेचने पर नहीं लगेगा LTCG टैक्स

IDEALSTOCK |  घरेलू बाजार में आई चौतरफा गिरावट ने बीते आठ महीनों में शेयरों में आई मजबूती को खत्म कर दिया है. बाजार ने अपनी सारी बढ़त गंवा दी है. मगर इस वजह से निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर है. निवेशकों को अभी बेचने पर 420 शेयरों पर एलटीसीजी टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा.

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अभी ये शेयर 31 जनवरी के अपने भाव से नीचे कारोबार कर रहे हैं. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) के कैलकुलेशन के लिए इस साल 31 जनवरी की तारीख निर्धारित की गई है. इस तारीख को शेयरों के भाव के आधार पर ही एलटीसीजी आंकलन होगा.

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गुरुवार को बीएसई 500 इंडेक्स के 366 शेयरों ने 31 जनवरी की कीमतों से 10 फीसदी नीचे कारोबार खत्म किया. 23 शेयरों में गिरावट 5 से 10 फीसदी की रही, जबकि 31 शेयरों ने 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की थी.

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लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स

IDEALSTOCK | बजट 2018 में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगाने की घोषणा की गई। वित्तमंत्री की इस घोषणा के बाद से भारतीय शेयर बाजार लगातार गोते लगा रहा है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स क्या है और इसका शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों पर क्या असर होगा इसके बारे में हम आपको इस लेख में विस्तार से और आसान शब्दों में समझाने का प्रयास करेंगे।

क्या है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स?

मान लीजिए आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं और आप 10 लाख रुपए के शेयर्स खरीद लेते हैं। कुछ दिन बाद आपको उन शेयरों पर 2 लाख रुपए का लाभ मिलता है यानि कि कुल मिलाकर आपका मूलधन और लाभ 12 लाख रुपए बन जाता है। अब यदि आप इस धन को 1 वर्ष से पहले निकाल लेते हैं तो आपको 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा और यदि 1 वर्ष के बाद निकालते हैं तो आपको 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा।

सिर्फ लाभ की राशि पर लगेगा टैक्स

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स सिर्फ लाभ पर ही लिया जाता है। आपके 2 लाख रुपए के मुनाफे पर ही टैक्स देय होगा ना कि पूरे 12 लाख रुपए की राशि पर यानि कि 2 लाख रुपए पर आपको 20 हजार रुपए का टैक्स अदा करना होगा और एक वर्ष से कम समय में निकालने पर आपको 15 प्रतिशत के हिसाब से 30 हजार रुपए का टैक्स अदा करना होगा।

1 लाख रुपए से अधिक लाभ पर देना होगा टैक्स

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स सिर्फ एक लाख से अधिक हुए लाभ पर ही देय होगा। यदि आपका कुल लाभ 1 लाख रुपए या उससे कम है तो उस पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगेगा। कुल मिलाकर यदि आप छोटे निवेशक हैं तो आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है। तमाम बड़े निवेशक जो एक दिन में कई सौ करोड़ रुपए का निवेश करते हैं उनके लिए ये टैक्स चिंता जनक है।

ऐसे समझें
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स कब लगता है-

1 लाख से अधिक के लाभ पर 10 प्रतिशत टैक्स, जब राशि को 1 साल के बाद निकाला जाएगा।

1 लाख से अधिक के लाभ पर 15 प्रतिशत टैक्स, जब राशि को 1 वर्ष से कम के समय में निकाला जाएगा। यहां शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।

टैक्स सिर्फ 1 लाख से अधिक की राशि पर लगेगा।

टैक्स सिर्फ लाभ की राशि पर कटेगा जो कि 1 लाख रुपए से अधिक होना चाहिए

एक लाख रुपए से कम की राशि पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाया गया है।

मार्केट का ‘तापमान’ कम करने की कोशिश

पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में धुंआधार तेजी देखी जा रही है। सेंसेक्स को 33 हजार से 36 हजार पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा वहीं निफ्टी भी 11 हजार से ऊपर कारोबार कर रहा था। हो सकता है कि सरकार मार्केट को सामान्य स्तर पर लाने के लिए इस तरह का टैक्स ला रही है। इससे मार्केट में तेजी से होने वाला उतार-चढ़ाव थम सकता है और बाजार के ज्यादा स्थिर बने रहने की संभावना बनी रहेगी।

इन 5 शेयरों में नजर आ रहा है दम, कीमतें भी हैं कम

IDEAL STOCK | प्रमुख index अपने सर्वोच्च स्तर से करीब 12 फीसदी तक नीचे खिसक आए हैं. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर भी मंदड़ियों का ही बोलबाला है. सिंतबर महीने के दौरान कई मिडकैप शेयरों की कीमतें 10 से 65 फीसदी तक घट गईं.

इसी तरह की पिटाई स्मॉलकैप शेयरों की भी हुई. कुछ स्मॉलकैप शेयरों ने 75 फीसदी तक का गोता लगाया. हालांकि, बाजार की इस गिरावट ने कई महंगे शेयरों को वैल्यूएशन के आधार पर किफायती बना दिया है. हम आपको ऐसे ही पांच शेयरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दाम कम हैं, मगर इनमें काफी दम दिख रहा है:

 एक्सिस बैंक
मौजूदा कीमत: 589.35 रुपये
सितंबर में बदलाव: -14.86 फीसदी
औसत टार्गेट प्राइस: 630.78 रुपये

एक्सिस बैंक का रेवेन्यू और परिचालन मुनाफा क्रमश: 19 फीसदी और 20 फीसदी की दर से बढ़ेगा. सोफत ने कहा, “वित्त वर्ष 2020 में कर्ज लागत कम होगी. बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत है. बैंक के पास उच्च स्तरीय के कॉर्पोरेट खाते हैं.”


बजाज फाइनेंस
मौजूदा कीमत: 2,266.05 रुपये
सितंबर में बदलाव: -27.89 फीसदी
औसत टार्गेट प्राइस: 2,519.40 रुपये

मौजूदा चुनौतीपूर्ण माहौल में बजाज फाइनेंस एक मजबूत एनबीएफसी है. पहले यह शेयर महंगा था. मगर, अब इसकी वैल्यूएशन किफायती है. रिलायंस सिक्योरिटीज के रिसर्च प्रमुख नवीन कुलकर्णी ने कहा, “एनबीएफसी सेक्टर में बजाज फाइनेंस सबसे बेहतर विकल्प है.”


जुबिलंट फूडवर्क्स
मौजूदा कीमत: 1,191.70 रुपये
सितंबर में बदलाव: -25.6 फीसदी
औसत टार्गेट प्राइस: 1,528.03 रुपये

जुबिलंट एक अच्छा शेयर है और इसकी वैल्यूएशन भी काफी कम हो गई है. कुलकर्णी ने कहा, “दूसरी तिमाही में कंपनी से कमाई में 40 फीसदी और रेवेन्यू में 19 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है.” फिलिप कैपिटल भी इस शेयर के प्रति आश्वस्त है.


टाइटन कंपनी
मौजूदा कीमत: 787.85 रुपये
सितंबर में बदलाव: -15.76 फीसदी
औसत टार्गेट प्राइस: 1,020.32 रुपये

“कंपनी को संगठित क्षेत्र में बढ़ी दिलचस्पी का खास लाभ मिल रहा है. इसका असर शेयरों में आई तेजी से भी दिखता है. सोने की कीमतें और कंपनी प्रबंधन की भूमिका अहम होगी.”



मौजूदा कीमत: 270.05 रुपये
सितंबर में बदलाव: -15.87 फीसदी
औसत टार्गेट प्राइस: 344.44 रुपये

आईटीसी की बैलेंस शीट के चलते इसका पक्ष ले रहे हैं. कंपनी का गैर-तंबाकू कारोबार बढ़ रहा है. “हम वित्त वर्ष 19 की दूसरी तिमाही में कंपनी से ठोस नतीजों की उम्मीद कर रहे हैं. कंपनी के एफएमसीजी कारोबार से अच्छी उम्मीद है.”

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आइडियल स्टॉक रिसर्च फर्म का दावा, 10% तक टूट सकता है बाजार

IDEALSTOCK बाजार में उठापटक का दौर जारी है. सोमवार को हल्की तेजी दिखाने वाला घरेलू शेयर बाजार मंगलवार को फिर नरम पड़ गया. बाजार में एक बार फिर बड़ी गिरावट दिखाई देने की आशंका है. आइडियल स्टॉक रिसर्च फर्म का दावा है वैश्विक ब्रोकरेज नोमुरा, जो भारतीय शेयर बाजार के प्रति खास आकर्षित नहीं है.

आइडियल स्टॉक का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अब भी 5 से 10 फीसदी तक टूट सकता है. निकट भविष्य में वैल्यूएशन अब भी आकर्षक नहीं हैं. हालांकि, बाजार की मौजूदा गिरावट ने कई शेयरों के वैल्यूएशन को काफी हद तक कम कर दिया है.

आइडियल स्टॉक बताते हे की नोमुरा एडवाइजरी एंड सिक्योरिटीज (इंडिया) ने अनुमान जताया है कि सितंबर 2019 तक निफ्टी 50 इंडेक्स 11,270 के स्तर तक पहुंचेगा. इससे पहले इस जापानी ब्रोकरेज का मत था कि निफ्टी जून 2019 तक 11,892 का लक्ष्य हासिल करेगा.

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अगस्त में वैल्यूएशन 18.8 गुना के शिखर स्तर पर था, जो अब लुढ़ककर 16.1 गुना पर आ गया है. “अर्निंग यील्ड और बॉन्ड यील्ड के बीच का फर्क अब भी दीर्घावधि औसत से काफी कम है, जो वैल्यूएशन अधिक होने के संकेत दे रहा है.”

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते तेजी से उछाल मारता कारोबारी घाटा भी चिंता का विषय है. इसके अलावा एनबीएफसी को लेकर कर्ज और लिक्विडिटी के पनप रहे सवाल भी निकट भविष्य में आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं.

सुस्त घरेलू विकास दर से नजदीकी समय में कमाई पर असर पड़ेगा. नोमुरा का कहना है कि तेल कंपनियों को कीमतों का दबाव झेलने का सरकार का फरमान भी कंपनियों पर कमाई का बोझ बढ़ा सकता है.

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बाटा इंडिया लि. खरीदें रुपये 950 के लक्ष्य पर: IDEAL STOCK

IDEALSTOCK बाटा इंडिया लि. के शेयर रूपये 950.0 के लक्ष्य मूल्य पर खरीदें . बाटा इंडिया लि. . का मौजूदा बाजार मूल्य रूपये 894.7 है .मार्केट एक्सपर्ट ने इसकी समयावधि इंट्रा डे तय की है, जब बाटा इंडिया लि. की कीमत अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच सकती है. निवेशकों को IDEAL STOCK की हिदायत है कि वे स्टॉपलॉस रुपये 864 रखें और इसका सख्ती से पालन करें.

बाटा इंडिया लि., चमड़ा क्षेत्र में सक्रिय, साल 1931 में निगमित, एक मिड कैप कंपनी है (मार्केट कैप – Rs 11499.36 करोड़) |

समाप्ति तिमाही 30-06-2018 के लिए, कंपनी द्वारा रिपोर्टेड स्टैंडअलोन बिक्री – Rs 797.28 करोड़ है, 26.09 % ऊपर, अंतिम तिमाही की बिक्री-Rs 632.31 करोड़ से, और 8.32 % ऊपर पिछले साल की इसी तिमाही की बिक्री – Rs 736.06 करोड़ से| नवीनतम तिमाही में कंपनी का Rs 82.55 करोड़ का रिपोर्टेड टैक्स पश्चात शुद्ध मुनाफा है| 30-06-2018 को, कंपनी के कुल, 128,527,540 शेयर बकाया है|

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Investor Disappointment आवास फाइनेंशियर्स की शेयर बाजार पर कमजोर शुरुआत

IDEALSTOCK: हाउसिंग फाइनेंस कंपनी आवास फाइनेंशियर्स के शेयर सोमवार को स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हो गए. बीएसई पर कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले 7.7 फीसदी डिस्काउंट के साथ 759 रुपये पर लिस्ट हुए, जिससे निेवेशक मायूस हो गए. इस शेयर का इश्यू प्राइस 821 रुपये था.

कंपनी का आईपीओ 25 सितंबर से 27 सितंबर के दौरान निवेश के लिए खुला था. आईपीओ के जरिए आवास फाइनेंशियर्स ने प्राथमिक बाजार से 1,734 करोड़ रुपये जुटाए थे. 818 रुपये से 821 रुपये के प्राइस बैंड वाला यह आईपीओ 0.97 फीसदी तक सब्सक्राइब हुआ था.

कई ब्रोकरेज फर्मों ने इस आईपोओ के बारे में मिलीजुली राय दी थी. आवास का बिजनेस काफी ठोस है, जो इसकी ग्रोथ की उम्मीद को मजबूत करता है.

बेहतर क्रेडिट क्वालिटी, बिजनेस सोर्सिंग, शानदार जोखिम प्रबंधन और बढ़िया कलेक्शन जैसे कारणों से कंपनी की स्थिति दृढ़ है. कंपनी के सकल एनपीए 0.5 फीसदी पर हैं, जो इसकी वैल्यूएशन को वाजिब ठहराते हैं.

ब्रोकरेज ने कहा, “61 फीसदी का वार्षिक रिटर्न, चुनौतीपूर्ण बाजार स्थितियां और ऊंची वैल्यूएशन का जोखिम आने वाले समय में तेजी को सीमित कर सकती हैं.” एन्टीक ब्रोकिंग ने कहा था कि यह शेयर वित्त वर्ष 19 के कमाई अनुमानों के 43 गुना की मांग कर रहा है, जो तेजी के आसार सीमित करता है.

कंपनी का कहना है कि वह आईपीओ से होने वाली आय में से 400 करोड़ रुपये का इस्तेमाल परिचालन पूंजी व अन्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए करेगी. कंपनी के शेयरधारकों ने आईपीओ में अपने 1,334 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की है.

फिलहाल शेयर बाजार की स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है. कमजोर सेंटिमेंट ने भी आईपीओ की लिस्टिंग पर असर डाला है. आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया, एडलवाइज फाइनेंशियल सर्विसेज, स्पार्क कैपिटल एडवाइर्जर्स (इंडिया) और एचडीएफसी बैंक इस इश्यू के मर्चेंट बैंकर्स थे.

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Be Careful Stock Investors Nifty Rock

IDEAL STOCK | महज 25 सत्रों में सेंसेक्स 4,600 अंक से ज्यादा टूट चुका है. बाजार की यह स्थिति किसी आपदा से कम नहीं है. अगर आप सोच रहे हैं कि बाजार बहुत गिर चुका है और इससे नीचे नहीं जाएगा तो आप गलत हैं. बाजार में और गिरावट आने वाली है.

आइडियल स्टॉक के अनुसार, दलाल पथ पर अभी असली ‘तूफान’ आना बाकी है. यह तूफान छह सप्ताह में दस्तक देगा. उनके तर्क विचारणीय हैं. मौजूदा समय में शेयर बाजार बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं. छोटी से बात का भी बाजार पर बड़ा असर होगा.

कमजोर अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उबाल, रुपये की सुस्ती और कुछ कंपनियों से जुड़े मसलों ने बाजार की बदतर कर दी है.

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आने वाले दिनों में कई बातें बाजार पर दबाव बढ़ा सकती हैं. अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध पहली वजह है. अमेरिका के मध्यावधि चुनाव दूसरी और भारत के घरेलू चुनाव तीसरी बड़ी वजह हैं.

दर्द अभी बाकी है
मारा मानना है कि “निफ्टी 9,900 के स्तर की तरफ बढ़ रहा है.” इसका अर्थ है कि निफ्टी में करीब 400 अंक और सेंसेक्स में लगभग 1,200 अंकों की और गिरावट आ सकती है.”आने वाले छह सप्ताह इक्विटी निवेशकों का दर्द बढ़ सकता है.

” बाजार की सबसे बड़ी चिंता ईरान पर लगने वाले प्रतिबंध हैं, जो 4 नवंबर से लागू होंगे. भारत अपने तेल की जरूरत का 10-12 फीसदी ईरान से आयात करता है.

हमारा मानना है कि “बाजार अभी इस मसले को हल्के में ले रहा है. रूस और सउदी अरब तेल के सबसे बड़ी उत्पादक हैं. इस वजह से वह वजह से ईरान पर प्रतिबंध को ज्यादा तवज्जों नहीं दे रहा है. छह सप्ताह बाद यानी नवंबर मध्य तक तस्वीर साफ हो जाएगी.

निवेशकों का इम्तिहान

विदेशी निवेशक तेजी से भारतीय बाजार से कन्नी काट रहे हैं. इस साल वे अभी तक 17,664 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जो साल 2008 के 52,987 करोड़ रुपये की निकासी के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है. बीते तीन सत्रों में विदेशी निवेशकों ने 1,500-1,600 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं.

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इस तरह की बिकवाली से बाजार और लुढ़क सकता है. विदेशी निवेशकों ने बीएसई 200 इंडेक्स के शेयरों में करीब $408 अरब का निवेश किया हुआ है. प्रभाकर ने कहा, “बाजार लिक्विडिटी पर चलते हैं. म्यूचुअल फंड स्कीमें नीचे हैं. ऐसे में रिटेल निवेशकों का विश्वास कायम रहना एक कठिन सवाल है.”

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव

नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होंगे. इन चुवानों के बाद अमेरिका दोस्ती और दुश्मनी कैसे करता है, इस पर सभी की नजरें होंगी. चुनाव ट्रेड वॉर और ईरानी प्रतिबंधों पर भी असर डालेंगे. “लोगों को ट्रेड वॉर पर नजर बनाए रखनी चाहिए, जो चुनावों के बाद बढ़ सकता है.”
ईरान के प्रतिबंधों का अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर गहरा असर होगा. भारत में कच्चा तेल और महंगा हो सकता है. इससे मंहगाई, चालू खाता घाटा, राजकोषीय घाटा, बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी सभी में बढ़ोतरी हो सकती है.

भारतीय राज्यों में चुनाव

इस साल भारत के पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं. इसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम शामिल हैं. इन चुनावों को आगामी लोकसभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा सकता है. भाटिया ने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव के परिणाम भी बाजार को डूबा सकते हैं.
“भारतीय बाजारों का प्रीमियम कम हुआ है, मगर यह अब भी दूसरों से ज्यादा है. इस वजह से और गिरावट आ सकती है.” कच्चे तेल की कीमतों में कटौती को भी बाजार ने अच्छा फैसला नहीं माना. इसे एक लोकलुभावन उपाय के रूप में देखा गया.
इस वजह से पेट्रोलियम कंपनियों के शेयरों ने दो ही सत्रों में एक तिहाई फीसदी तक का गोता लगाया. बाजार को उम्मीद है कि चुनावों से पहले सरकार कई लोकलुभावन वादे कर सकती है. पेट्रोल और डीजल के दाम आने वाले चुनावों में अहम मुद्दा बन कर उभरेंगे.

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