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IDEAL STOCK

25 stocks fell 10-30% in only 4 exchanging sessions.

IDEALSTOCK | In the S&P BSE Mid-top record, three stocks slipped 10-30% which incorporate names like L&T Back Holdings, Piramal Enterprises, and Indiabulls Housing Finance. The S&P BSE Sensex lost 1.2 percent while Nifty50 saw a decrease of 1.6 percent for the week finished October 12 however the genuine savagery was found in little and midcaps which dove 10-30 percent in a similar period.

Upwards of 25 stocks in the S&P BSE500 record dove, 10-30 percent for the week finished

19 October which incorporates names like Indiabulls Housing Finance, Dewan Housing Finance, Indiabulls Real Estate, PNB Housing Finance, 8K Miles, Kwality, Dish TV, Avenue Supermarts, Yes Bank, Bandhan Bank and so on among others.

Frail worldwide signs, exchange war concerns, ascend in unrefined petroleum costs, the rise of liquidity fears in NBFCs and additionally NBFCs, alongside frail macroeconomic information, for example, ascend in swelling and fall in IIP, offering weight from outside financial specialists, blended outcomes from.

Read also:- TOP HOLDING 20 – 20 STOCK OF OCTOBER

India Inc. and hawkish critique of US Federal Reserve all weighed on the conclusion.

In the S&P BSE Small-Cap list Adlabs Entertainment slipped 20 percent, trailed by Nutraplus India (down 19%), 8K Miles (down 18%), Mcnally Bharat (down 18%), Repro Home Back (down 16%), Edelweiss Financial Services (down 15%) and so forth among others. In the S&P BSE Mid-top file, three stocks slipped 10-30% which incorporate names like L&T Back Holdings, Piramal Enterprises, and Indiabulls Housing Finance. Indian markets saw substantial offering weight close key obstruction levels and in the long run, it broke underneath 10,300 levels on an intraday premise. The Nifty50 slipped 1.6 percent for the week yet shut over 10,300 levels at 10,303.

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TOP HOLDING 20 – 20 STOCK OF OCTOBER

IDEALSTOCK |  आपको उन 20 स्टॉक्स के बारे में जानकारी देंगे जिनमें आज ट्रेडिंग कर के आप कमा सकते हैं मुनाफा। भले ही वो शेयर चढ़े या लुढ़के आपको फायदा देकर ही जाएंगे। यानी 20 शेयरों में आज खरीदने या बेचने पर सलाह। ये सभी स्टॉक्स अक्टूबर होल्डिंग के लिए हैं .

Happy Dussehra

पहले टीम हैं A

DCB Bank: Buy – Rs 160, Stoplaus – 158, Target – 165 get intraday call for same script click here

BPCL: Buy – Rs 285, Stoploss – 280, Target – Rs. 295 get intraday call for same script to click here

IOC: Buy – Rs 132, Stoploss – Rs 130, Target – 142 get intraday call for same script click here

HPCL: Buy – Rs 207, Stoploss – Rs 205, Target – Rs 217 get intraday call for same script click here

MindTree: Sell – Rs 978, Stoplaus – Rs 988, Target – 951 get intraday call for same script click here

Jet Airways: Buy – Rs 216.5, Stoploss – Rs 214, Target – Rs 224 get intraday call for the same script to click here

Thangamayel Jewelery: Buy – Rs 352.15, Stoploss – Rs 350, Target – Rs 363 get intraday call for same script to click here

Titan: Buy – Rs 800, Stoploss – Rs 792, Target – 824 get intraday call for same script click here

ACC: Sell – Rs 1540, Stoploss – Rs 1555, Target – Rs 1495 get intraday call for same script click here

Astral Poly: Buy – Rs 945, Stop Loss – Rs 940, Target – 975 get intraday call for same script to click here

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पहले टीम हैं B

Sunflag: buy – Rs 59.4, stoploss – Rs 59, target – Rs 63 get intraday call for same script click here

Vardhaman Special Steels: Buy – Rs 107, Stoplaus – 104, Target – 130 get intraday call for same script click here

MT Education: Buy – Rs 51.25, Stoplaus – Rs 51, Target – Rs 55 get intraday call for same script click here

Career Point: Buy – Rs. 73, Stop Loss – 72 Rs, Target – Rs. 80 get intraday call for same script click here

TBZ: Buy – Rs 56.9, Stoplaus – 56, Target – Rs 59 get intraday call for same script click here

PC Jewelery: Buy – Rs 56, Stoplaus – 55, Target – 65 Rs get intraday call for same script click here

Arvind: Sell – Rs 315, Stoploss – Rs 318, Target – 300 get intraday call for same script click here

Raymond: Sell – Rs 642, Stoploss – Rs 650, Target – 630 get intraday call for same script click here

Century Textiles: Sell – Rs 785, Stoploss – Rs 790, Target – Rs 740 get intraday call for same script click here

Ujjivan: Sell – Rs 232, Stoploss – Rs 238, Target – Rs 215 get intraday call for same script click here

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डीएलएफ लि. | बजाज ऑटो फाइनेंस लि. | आज का ट्रेंड

IDEALSTOCK | डीएलएफ लि. के शेयर रूपये 135.0 के लक्ष्य मूल्य पर बेचें . डीएलएफ लि. . का मौजूदा बाजार मूल्य रूपये 144.45 है .मार्केट एक्सपर्ट ने इसकी समयावधि इंट्रा डे तय की है, जब डीएलएफ लि. की कीमत अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच सकती है. स्टॉपलॉस रुपये 150 रखें और इसका सख्ती से पालन करें.
डीएलएफ लि., निर्माण क्षेत्र क्षेत्र में सक्रिय, साल 1963 में निगमित, एक लार्ज कैप कंपनी है (मार्केट कैप – Rs
25774.60 करोड़) |

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समाप्ति तिमाही 30-06-2018 के लिए, कंपनी द्वारा रिपोर्टेड संगठित बिक्री – Rs 1507.35 करोड़ है, 9.41 %
ऊपर, अंतिम तिमाही की बिक्री-Rs 1377.66 करोड़ से, और -26.39 % नीचे पिछले साल की इसी तिमाही की
बिक्री – Rs 2047.70 करोड़ से| नवीनतम तिमाही में कंपनी का Rs -69.06 करोड़ का रिपोर्टेड टैक्स
पश्चात शुद्ध मुनाफा है|

IDEALSTOCK | बजाज ऑटो फाइनेंस लि. के शेयर रूपये 1950.0 के लक्ष्य मूल्य पर बेचें . बजाज ऑटो फाइनेंस लि. . का मौजूदा बाजार मूल्य रूपये 2151.55 है .मार्केट एक्सपर्ट ने इसकी समयावधि इंट्रा डे तय की है, जब बजाज ऑटो फाइनेंस लि. की कीमत अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच सकती है.  स्टॉपलॉस रुपये 2250 रखें और इसका सख्ती से पालन करें.

यह भी पढ़ें : सऊदी अरब में तनाव

बजाज ऑटो फाइनेंस लि., वित्त क्षेत्र में सक्रिय, साल 1987 में निगमित, एक लार्ज कैप कंपनी है (मार्केट कैप – Rs
124352.79 करोड़) |

यह भी पढ़ें : रिजर्व बैंक लौटा सकता है NBFC में भरोसा

समाप्ति तिमाही 30-06-2018 के लिए, कंपनी द्वारा रिपोर्टेड संगठित बिक्री – Rs 3936.45 करोड़ है, 12.69 %
ऊपर, अंतिम तिमाही की बिक्री-Rs 3493.08 करोड़ से, और 38.96 % ऊपर पिछले साल की इसी तिमाही की
बिक्री – Rs 2832.85 करोड़ से| नवीनतम तिमाही में कंपनी का Rs 835.89 करोड़ का रिपोर्टेड टैक्स
पश्चात शुद्ध मुनाफा है| 30-09-2018 को, कंपनी के कुल, 577,968,388 शेयर बकाया है|

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त्योहारी मांग घटने से हाजिर बाजार में सस्ता हुआ सोना

IDEALSTOCK| कमजोर वैश्विक रुख और घरेलू मांग में कमी के चलते दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 150 रुपये गिरकर 32,030 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया. सिक्का निर्माताओं एवं औद्योगिक इकाइयों के उठाव कम करने से चांदी भी 220 रुपये गिरकर 39,480 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही.

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कारोबारियों ने कहा कि डॉलर में मजबूती से वैश्विक स्तर पर कीमती धातु के रुख में नरमी रही. इसका असर स्थानीय बाजार में भी सोने के भाव पर देखने को मिला. इसके अलावा, स्थानीय आभूषण कारोबारियों और खुदरा विक्रेताओं की मांग घटने से भी सोने पर दबाव रहा. वैश्विक स्तर पर, सिंगापुर में सोना 0.15 फीसदी गिरकर 1,223.70 डॉलर प्रति औंस रहा. चांदी 0.14 फीसदी गिरकर 14.71 डॉलर प्रति औंस रही.

दिल्ली सर्राफा बाजार में, 99.9 फीसदी और 99.5 फीसदी शुद्धता वाला सोना 150 और 140 रुपये गिरकर क्रमश: 32,030 रुपये और 31,880 रुपये प्रति दस ग्राम पर रहा. हालांकि, सीमित सौदों में आठ ग्राम वाली गिन्नी 24,700 रुपये प्रति इकाई के पूर्व स्तर पर टिकी रही.

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चांदी हाजिर 220 रुपये गिरकर 39,480 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक डिलीवरी 240 रुपये गिरकर 38,860 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही. हालांकि, चांदी सिक्का लिवाल एवं बिकवाल क्रमश: 75,000 और 76,000 रुपये प्रति सैकड़ा के पूर्व स्तर पर रहे.

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रिजर्व बैंक लौटा सकता है NBFC में भरोसा: रसेश शाह

IDEALSTOCK | गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की ग्रोथ आने वाले समय में घट सकती है. यह कहना है एडलवाइज समूह के चेयरमैन रसेश शाह का. ईटी से खास बातचीत में शाह ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. यहां पेश है बातचीत के मुख्य अंश:

प्रश्न: क्या एनबीएफसी के लिए कर्ज घट रहा है?
उत्तर: पिछले कुछ समय में लिक्विडिटी कम हुई है. बीते तीन से चार दिनों में इसमें सुधार हुआ है, मगर यह पुरान स्तर पर नहीं पहुंची है. जब आईएलएंडएफएस की रेटिंग घटी थी तो संस्थान काफी ज्यादा डर गए थे.
म्यूचुअल फंड्स ने कर्ज से जुड़ा जोखिम देखा, मगर लिक्विडिटी से जुड़ा जोखिम नहीं देखा. वे बैंकों की तरह लिक्विडिटी से जुड़ी समस्याओं के लिए तैयार नहीं थे. इससे तिमाही के अंत तक कई संकट पैदा हो गए. लिक्विडिटी की दिक्कतें उभर आईं.

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प्रश्न: क्या आने वाले समय में एनबीएफसी की ग्रोथ घट जाएगी?
उत्तर: इसका असर अर्थव्यवस्था पर जरूर पड़ेगा. दिलावी से पहले बाजार को कुछ झटके लग सकते हैं. सिस्टम में बढ़ने वाले कर्ज का करीब 30 फीसदी हिस्सा एनबीएफसी से आता है. इस वजह से छोटी अवधि की रुकावटे आनी
तय है. बैंक देश के हर कोने में अब भी नहीं पहुंचे हैं.
एनबीएफसी में अभी करीब 40 लाख लोग काम करते हैं, जो मुख्यत: कमीशन पर निर्भर हैं. अक्टूबर में उनके कमीशन, कमाई और अन्य भत्तों पर भी असर होगा. कई इलाकों में बैंक नहीं पहुंच पाए और एनबीएफसी ने इसी का
लाभ उठाया. यदि इन पर असर पड़ा तो अल्पावधि में कर्ज स्थिति भी प्रभावित होगी.

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प्रश्न: क्या बुनियादी बिजनेस ने एनबीएफसी के बिजनेस मॉडल को प्रभावित किया है?
उत्तर: सामान्य स्थिति में, एनबीएफसी में म्यूचुअल फंड्स का पैसा लगा होता है. लेनदारी और देनदारी के बीच का संतुलन जरूरी है. इस सीन में खास बदलाव नहीं हुए हैं. नए वितरण के समय दिक्कतें आती हैं, क्योंकि आप
नहीं जानते क्या भविष्य में भी पैसा मिलता रहेगा. यह बाजार का एक विचित्र दौर है.

प्रश्न: इसका हल क्या है?
उत्तर: किसी को तो फिर से विश्वास जगाना होगा. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) यह कर सकता है. एसबीआई ने कई कंपनियों के पोर्टफोलियो खरीदने का ऐलान किया. इससे बाजार में कुछ भरोसा लौटा. रिजर्व बैंक को एक
सतत बाजार का निर्माण करने जरूरत है, जिसमें वित्त प्रवाह जारी रहे.

संपत्तियों को पुन: फाइनेंस किया जा सकता है. इसके लिए निश्चित तौर पर शुल्क होना चाहिए. रिजर्व बैंक को लिक्विडिटी के नियम पेश करने चाहिए. हर एनबीएफसी ने अपने हिसाब से नियम तय कर रखे हैं. मगर सभी के
लिए सामान्य नियम बेहतर हैं.

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प्रश्न: लिक्विडिटी के बारे में क्या कहेंगे?
उत्तर: लोगों ने म्यूचुअल फंड्स से पैसा निकाल कर बैंकों में जमा किया है. म्यूचुअल फंड्स के पास लिक्विडिटी है, मगर एनबीएफसी तक यह नहीं पहुंच रही है. स्थिति सुधर रही है. एनबीएफसी की रफ्तार सुस्त पड़ेगी. बैंक से
कर्ज और म्यूचुअल फंड में पैसा वापस आने से स्थिरता लौटेगी.

प्रश्न: एनबीएफसी कारोबार का आकार कितना बड़ा है?
उत्तर: एनबीएफसी के एसेट आकार के बारे में बाते करें, तो यह निजी बैंकों के बराबर होगा. भारत में कर्ज का स्तर कुल 100 लाख करोड़ रुपये का है. 50 फीसदी बाजार सरकारी बैंकों के पास है, 25 फीसदी निजी बैंकों के पास है.
शेष एक चौथाई बाजार एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के पास है.

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प्रश्न: इस तेजी का कारण क्या है?
उत्तर: देश में 20 निजी बैंक और 300 से अधिक एनबीएफसी हैं. बैंकों की तुलना में एनबीएफसी अधिक तेजी से बढ़े हैं. इंडस्ट्री क्रेडिट 14 से 15 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ा है. पिछले पांच सालों में बैंक 8 से 9 फीसदी से
अधिक की दर से नहीं बढ़ पाए हैं.

उन पर डूबे कर्ज और कम पूंजी का साया है. एनबीएफसी ने इसी फर्क का लाभ उठाया है. एनबीएफसी की क्रेडिट ग्रोथ 25 फीसदी रही है, जबकि बैंकों की करीब

प्रश्न: क्या आईएलएंडएफएस की तुलना रिटेल एनबीएफसी से की जा सकती है?
उत्तर: आईएलएंडएफएस एक इंडस्ट्रियल होल्डिंग कंपनी है. यह एक शुद्ध एनबीएफसी नहीं है. इसकी सीधे तौर पर तुलना एनबीएफसी के कारोबार से नहीं की जा सकती है. वे कर्ज देती हैं, जबकि आईएलएंडएफएस इंफ्रास्ट्रक्चर की
परियोजनाओं में निवेश करती है. 8 से 9 फीसदी की ही रही है.

प्रश्न: एडलवाइज समूह की कौनसी कंपनियां इस साल मुनाफा देंगी?
उत्तर: एसेट मैनेजमेंट और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. आने वाले समय में ग्रोथ कुछ कमजोर पड़ सकती है. कुछ तिमाही मुनाफे पर भी असर होगा. निवेशक इस बात को समझते हैं. छह महीने हम
लिक्विडिटी और क्वालिटी पर जोर देना चाहते हैं.

हम ग्रोथ को लेकर हड़बड़ी में नहीं हैं. एक बार मुनाफा एडजस्ट हो जाए तो हमारी गाड़ी ग्रोथ की पटरी पर लौट आएगी. निवेशकों को ग्रोथ के साथ-साथ क्वालिटी, लिक्विडिटी और दीर्घावधि अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए. यही
एक एनबीएफसी का मूलमंत्र है.

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प्रश्न: आपके अनुसार अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है?
उत्तर: भारत के लिए तेल काफी बड़ी समस्या है. भारत तेल के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है. इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. ऑटो बिक्री घट रही है. रिजर्व बैंक ने इस बार ब्याज दरों में इजाफा नहीं किया.

नोटबंदी और जीएसटी के बाद अर्थव्यववस्था अच्छा कर रही है. स्टील, सीमेंट, पेपर इंडस्ट्रीज बढ़ रही है. हाउसिंग कारोबार भी रफ्तार पकड़ेगा. रुपया गिरने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है. हमारा निर्यात भी बढ़ रहा
हैं, जो अच्छी खबर है.

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क्या आपको HUL के शेयरों में निवेश करना चाहिए?

IDEALSTOCK: हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के सितंबर तिमाही के नतीजे अच्छे रहे हैं. इससे कई ब्रोकरेज फर्मों ने इस कंपनी को लेकर अच्छी संभावना जताई है. कंपनी ने शुक्रवार को अपने नतीजों का एलान किया. इसका मुनाफा 19.51 फीसदी बढ़ा है. कई कैटेगरी में कंपनी ने 10 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दिखाई है.

सितंबर तिमाही में कंपनी ने 1,525 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है. एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 1,276 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. मॉर्गन स्टेनली ने कंपनी के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है. उसने इसके शेयरों के लिए 1,260 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है. उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “कंपनी के मार्जिन में अच्छी वृद्धि जारी है. कंपनी का मुनाफा हमारे अनुमान से 5 फीसदी ज्यादा रहा है.”

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इसके शेयरों के लिए 1,870 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है. उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “परिचालन के स्तर पर कंपनी अपनी ताकत दिखा रही है. मांग में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है.” सीएलएसए ने भी एचयूएल के शेयरों को लेकर सकारात्मक राय दी है.

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24 फीसदी की एडजस्टेड एबिड्टा ग्रोथ और 10 फीसदी की वॉल्यूम ग्रोथ हमारे अनुमाने के मुकाबले ज्यादा रही है. हालांकि, उसने यह भी कहा है कि भविष्य में कंपनी के मार्जिन को लेकर थोड़ा संदेह दिख रहा है. लेकिन कंपनी का प्रबंधन काफी सकारात्मक नजर आ रहा है. इस ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी के शेयरों के लिए 1,750 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है.

सिटी ने एचयूएल के शेयरों के बारे में अपनी राय बदलकर ‘तटस्थ’ कर दी है. इसने इसके शेयरों के लिए 1,660 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है. उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “इसके शेयरों में गिरावट के बाद हमें आगे अच्छी संभावना दिख रही है. कंपनी की आय अच्छे स्तर पर बनी हुई है. ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ रही है”

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सितंबर तिमाही में कंपनी की बिक्री 9,138 करोड़ रुपये रही. पिछले साल की समान अवधि में यह 8,199 करोड़ रुपये रही. इस तरह सेल्स 11.45 फीसदी बढ़ी है. कंपनी ने नियामक को यह जानकारी दी है. मंगलवार को कंपनी के शेयर का भाव दोपहर में 1 फीसदी की मजबूती के साथ 1541.85 रुपये पर था.

Investment & Finance Sector Analysis Report

IDEALSTOCK | There are 11,522 Non-Banking Financial Companies (NBFCs) registered with the Reserve Bank of India out of which a lion’s share of 98.5% are non-deposit accepting with the balance of 1.5% being deposit accepting NBFCs. Around 218 non-deposit accepting NBFCs have been classified as systemically important. NBFCs have established the presence in specialized segments, for e.g. HDFC (mortgage loans), Mahindra Finance (Agri finance), Power Finance Corporation (power finance) & Shriram Transport Finance (pre-owned commercial vehicle finance).

Present in the competing fields of vehicle financing, housing loans, hire purchase, lease and personal loans, NBFCs, have emerged as key financial intermediaries for small-scale and retail sectors thereby forming an essential part of shadow banking in India. NBFCs are the third largest segment in the Indian financial system after commercial banks and insurance companies and account for 9% of the total financial assets. Moreover, small and medium enterprise loans account for 10.5% share in the overall credit of NBFCs in FY17. In the case of banks, MSE loans accounted for a mere 5.2%.

HOW TO RESEARCH THE INVESTMENT & FINANCE SECTOR

(KEY POINTS)

But unlike the shadow banking entities in other countries, NBFCs are regulated by the Reserve Bank of India that has been working towards bringing them at par with the banking regulations. Armed with easier sanction procedures, flexibility, and wide reach in small towns and cities, NBFCs stand on a surer footing vis-a-vis banks.

Unlike banks, NBFCs are not required to maintain cash reserve ratio (CRR) and a statutory liquid ratio (SLR). The even priority sector lending norm of 40% (of total advances) is not applicable to them.

But NBFCs cannot access low-cost deposits like their banking peers. Borrowings make up a lion’s share of 70% of their liabilities, as per CARE Ratings. A number of NBFCs have been issuing non-convertible debentures (NCDs) in order to increase liquidity. For systemically important NBFCs, debentures had the largest share 49% of borrowings in FY17. Bank borrowings and commercial paper account for 22% and 10% in the liability mix.

In November 2014, the Reserve Bank of India tightened norms in asset classification and provisioning for NBFCs to bring them at par with banks. The time period after which an overdue asset would be classified as a non-performing was reduced from six months to three months in a phase-wise manner until FY18. Similarly, the time period for classification of sub-standard and doubtful assets was also reduced from 18 months to 12 months. Additionally, the provisioning for standard assets was increased from 0.25% to 0.4% of the outstanding by FY18. These developments have led to an increase in the bad loans and provisions for NBC’s.

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crude oil price today सऊदी अरब में तनाव

ideal stock

IDEALSTOCK. पिछले हफ्ते की भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल में आज तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड का भाव 1 फीसदी चढ़कर 81 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है. वहीं नायमेक्स क्रूड का दाम 1.12 फीसदी की तेजी के साथ 72 डॉलर के पार चला गया है. घरेलू बाजार की बात करें तो MCX पर कच्चे तेल का भाव 0.97 फीसदी की तेजी के साथ 5,294 रुपये पर पहुंच गया है.

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एक प्रमुख सऊदी पत्रकार के गायब होने पर राजनीतिक तनाव बढ़ा है. इसके अलावा अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध के लागू होने की तारीख काफी नजदीक आ गई है. अमेरिका ने भारत सहित कई देशों से 4 नवंबर से ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर देने के लिए कहा है.

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इस बीच दक्षिण कोरिया ने ईरान से क्रूड का इंपोर्ट पूरी तरह से बंद कर दिया है. सितंबर में उसने यहां से क्रूड का इंपोर्ट नहीं किया. ऐसे में आगे चलकर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इन वजहों से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटी है, क्योंकि बाजार को सप्लाई घटने का डर सता रहा है.

हालांकि दूसरी ओर तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक ने 2018 और 2019 में कच्चे तेल की मांग में कमी का अनुमान जताया है. इससे आगे कीमतों में बहुत ज्यादा तेजी के संकेत नहीं दिख रहे हैं.

इन 420 कंपनियों के शेयर बेचने पर नहीं लगेगा LTCG टैक्स

IDEALSTOCK |  घरेलू बाजार में आई चौतरफा गिरावट ने बीते आठ महीनों में शेयरों में आई मजबूती को खत्म कर दिया है. बाजार ने अपनी सारी बढ़त गंवा दी है. मगर इस वजह से निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर है. निवेशकों को अभी बेचने पर 420 शेयरों पर एलटीसीजी टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा.

इसे भी पढ़ें: क्या होता हैं LTCG TAX

अभी ये शेयर 31 जनवरी के अपने भाव से नीचे कारोबार कर रहे हैं. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) के कैलकुलेशन के लिए इस साल 31 जनवरी की तारीख निर्धारित की गई है. इस तारीख को शेयरों के भाव के आधार पर ही एलटीसीजी आंकलन होगा.

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गुरुवार को बीएसई 500 इंडेक्स के 366 शेयरों ने 31 जनवरी की कीमतों से 10 फीसदी नीचे कारोबार खत्म किया. 23 शेयरों में गिरावट 5 से 10 फीसदी की रही, जबकि 31 शेयरों ने 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की थी.

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लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स

IDEALSTOCK | बजट 2018 में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगाने की घोषणा की गई। वित्तमंत्री की इस घोषणा के बाद से भारतीय शेयर बाजार लगातार गोते लगा रहा है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स क्या है और इसका शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों पर क्या असर होगा इसके बारे में हम आपको इस लेख में विस्तार से और आसान शब्दों में समझाने का प्रयास करेंगे।

क्या है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स?

मान लीजिए आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं और आप 10 लाख रुपए के शेयर्स खरीद लेते हैं। कुछ दिन बाद आपको उन शेयरों पर 2 लाख रुपए का लाभ मिलता है यानि कि कुल मिलाकर आपका मूलधन और लाभ 12 लाख रुपए बन जाता है। अब यदि आप इस धन को 1 वर्ष से पहले निकाल लेते हैं तो आपको 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा और यदि 1 वर्ष के बाद निकालते हैं तो आपको 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा।

सिर्फ लाभ की राशि पर लगेगा टैक्स

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स सिर्फ लाभ पर ही लिया जाता है। आपके 2 लाख रुपए के मुनाफे पर ही टैक्स देय होगा ना कि पूरे 12 लाख रुपए की राशि पर यानि कि 2 लाख रुपए पर आपको 20 हजार रुपए का टैक्स अदा करना होगा और एक वर्ष से कम समय में निकालने पर आपको 15 प्रतिशत के हिसाब से 30 हजार रुपए का टैक्स अदा करना होगा।

1 लाख रुपए से अधिक लाभ पर देना होगा टैक्स

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स सिर्फ एक लाख से अधिक हुए लाभ पर ही देय होगा। यदि आपका कुल लाभ 1 लाख रुपए या उससे कम है तो उस पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगेगा। कुल मिलाकर यदि आप छोटे निवेशक हैं तो आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है। तमाम बड़े निवेशक जो एक दिन में कई सौ करोड़ रुपए का निवेश करते हैं उनके लिए ये टैक्स चिंता जनक है।

ऐसे समझें
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स कब लगता है-

1 लाख से अधिक के लाभ पर 10 प्रतिशत टैक्स, जब राशि को 1 साल के बाद निकाला जाएगा।

1 लाख से अधिक के लाभ पर 15 प्रतिशत टैक्स, जब राशि को 1 वर्ष से कम के समय में निकाला जाएगा। यहां शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।

टैक्स सिर्फ 1 लाख से अधिक की राशि पर लगेगा।

टैक्स सिर्फ लाभ की राशि पर कटेगा जो कि 1 लाख रुपए से अधिक होना चाहिए

एक लाख रुपए से कम की राशि पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाया गया है।

मार्केट का ‘तापमान’ कम करने की कोशिश

पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में धुंआधार तेजी देखी जा रही है। सेंसेक्स को 33 हजार से 36 हजार पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा वहीं निफ्टी भी 11 हजार से ऊपर कारोबार कर रहा था। हो सकता है कि सरकार मार्केट को सामान्य स्तर पर लाने के लिए इस तरह का टैक्स ला रही है। इससे मार्केट में तेजी से होने वाला उतार-चढ़ाव थम सकता है और बाजार के ज्यादा स्थिर बने रहने की संभावना बनी रहेगी।