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Stock Market 792 points as RBI disappoints

IDEAL STOCK: सप्ताह के अंतिम दिन भी घरेलू शेयर बाजार मंदड़ियों की गिराफ्त में बना रहा. रिजर्व बैंक ने अपनी मुद्रा समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. उम्मीद के विपरीत नतीजों ने बाजार को धाराशाई कर दिया. सेंसेक्स 950 अंक तक लुढ़क गया. हालांकि, बाद में थोड़ा संभला. आरबीआई की मौद्रिक नीति के बाद रुपया पहली दफा 74 के स्तर के पार चला गया. कच्चे तेल की मंहगाई लगातार बाजार पर दबाव बढ़ा रही है.

औंधे मुंह गिर रहा बाजार निवेशकों को मोटी चपत लगा रहा है. शुक्रवार को बाजार में 4 लाख करोड़ रुपये की दौलत साफ हो गई. बीएसई सेंसेक्स पर केवल तीन शेयर ही चढ़ सके.

बीएसई सेंसेक्स ने 792 अंक या 2.25 फीसदी का बड़ा गोता लगाकर 34,377 पर कारोबार खत्म किया. निफ्टी 50 इंडेक्स भी 282 अंक या 2.67 फीसदी फिसल कर 10,316 के स्तर पर बंद हुआ. मिडकैप इंडेक्स ने ढाई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स ने भी 2 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की.

निफ्टी 50 पैक पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के शेयर एक बार फिर 16 से 25 फीसदी तक टूटे. इसके अलावा ओएनजीसी, गेल (इंडिया), बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, अडानी पोर्ट्स और जी एंटरटेनमेंट ने भी 5 से 14 फीसदी की गिरावट दर्ज की.

दूसरी तरफ, इंफोसिस के शेयर 2 फीसदी तक चढ़े. इसके अलावा सिर्फ भारती इंफ्राटेल, टीसीएस, टाइटन कंपनी, इंडसइंड बैंक, डॉ. रेड्डीज लैब्स, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और सिप्ला के शेयरों ही हरे निशान के साथ सप्ताह का अंत करने में सफल रहे.

शुक्रवार के सत्र दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स के अलावा के सभी सूचकांक लाल निशान के साथ बंद हुए. आईटी शेयरों में इंफीबीम के शेयरों ने 5 फीसदी तक गिरावट दर्ज की. पीएसयू बैंक इंडेक्स 4 फीसदी, जबकि मेटल, मीडिया और ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी से अधिक टूटे. सभी ऑटो शेयरो नरम रहे.

सरकारी बैंकों में सिर्फ आईडीबीआई बैंक के शेयर चढ़े. इंडियन बैंक ने 9 फीसदी का गोता लगाया. मेटल शेयरों में जिंदल स्टील के शेयर 12 फीसदी टूटे. मीडिया इंडेक्स पर सिर्फ डेन नेटवर्क के शेयर चढ़े, जबकि डिश टीवी 8 फीसदी नीचे आया. अशोक लेलैंड के शेयर 9 फीसदी लुढ़के.

शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान, एनएसई पर केवल आठ कंपनियों के शेयरों ने अपने 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर हासिल किया. इसके उलट 370 कंपनियों के शेयर अपने 52 सप्ताह के न्यूनतम स्तर तक भी फिसले.

सप्ताह के अंतिम दिन निफ्टी 50 इंडेक्स पर केवल आठ शेयर हरे, जबकि 42 शेयर लाल निशान के साथ बंद हुए. बीएसई पर 701 शेयरों ने मजबूती के साथ और 1,950 शेयरों ने कमजोरी के साथ दिन का कारोबार का अंत किया.

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Market के गोता लगाने के बाद क्या करें | ideal stock

शुक्रवार को घरेलू कंपनियों के शेयरों ने गोता लगा दिया। मार्केट में गिरावट की अगुवाई अगली पंक्ति के कुछ बैंकों और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों ने की जिन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। शुक्रवार को ट्रेंडिंग में इतना उथल-पुथल मचा हुआ था कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 31 शेयरों का सूचकांक सेंसेक्स 1,500 अंक तक टूट गया और मिनटों में इसने 800 से ज्यादा अंकों की मजबूती भी हासिल कर ली। मार्केट एक्सपर्ट्स कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और वैश्विक बाजार की गिरावट को इसकी वजह बताई। इनके अलावा, उन्होंने अचानक आई इतनी बड़ी गिरावट का जिम्मेदार आईएलऐंडएफएस में वित्तीय संकट और यस बैंक के शेयरों के पिटने को बताया। मार्केट एक्सपर्ट्स सितबंर महीने में ही सूचकांकों में आई 2,000 पॉइंट्स से ज्यादा की आई गिरावट के मद्देनजर कुछ सलाह दे रहे हैं…


Fundamental view

यह किसी Technical saleoff जैसा जान पड़ता है। कुछ नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों (NBFC) ने बताया था कि उनका Short Term Liquidity Situation
बहुत अच्छा है। जब मैं short term की बात कर रहा हूं अगले एक वर्ष तक के दायित्वों के निर्वहन के लिहाज से उनके अकाउंट में काफी कैश पड़े हुए हैं।  अगर आप सच में कंपनी को समझते हैं और आपको इसके मैनेजमेंट पर भरोसा है तो आपके पास इनके शेयर खरीदने का शानदार मौका है। जब कभी भी मैनेजमेंट मजबूत दिखता है, वह अचानक आई आफतों का डटकर मुकाबला करता है और इससे पार पाते हुए और मजबूत बनकर उभरता है।
जहां तक रुपये की बात है, तो याद कीजिए 2014 में रुपया डॉलर के मुकाबले 70 पर था। 2017 में यह 63 पर आ गया और फिर 63 से 72 पर चला गया। अब आप 63 से 72 की यात्रा देखेंगे तो आपको लगेगा कि रुपया 12 प्रतिशत टूट गया है,
लेकिन हम इसकी 2014 के स्तर से करते हैं और तब इसमें महज 3 से 4 प्रतिशत की गिरावट ही है।

Technical view

मार्केट की पहली चीज है- कीमतें और दूसरी- अर्निंग्स और सभी फंडामेंटल्स। इसलिए, जब कीमतें 50 से 55 प्रतिशत तक गिर जाएं तो हम सबसे पहले यह देखना चाहते हैं कि क्या कोई कोई बड़ी समस्या है और अगर ऐसा नहीं है तो यह गिरावट
प्रतिक्रिया स्वरूप आई है। अगर आपके पास अच्छी कंपनियों के शेयर हैं, तो आपको कीमतों की बहुत चिंता नहीं होगी। नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों के कारोबार में अक्सर कहा जाता है कि आपको सर्वोत्तम के साथ टिके रहना होता है। अगर आप अच्छे क्वॉलिटी शेयर खरीद रहे हैं और इनके भाव गिर जाएं तो आपको और शेयर खरीदने चाहिए। लेकिन, हम जैसे लोगों ने पहले से ही निवेश कर रखा है। अब इसमें डालने के लिए कुछ है नहीं। अक्टूबर रिजल्ट आने के बाद अच्छे शेयर मजबूती हासिल करेंगे। फिलहाल, अभी जो कीमतें दिख रही हैं, वह आपको परेशान कर रही होंगी, जैसा कि मुझे कर रही हैं।

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